'औरंगजेब का मकबरा संरक्षित स्मारक, लेकिन उसके महिमामंडन की अनुमति नहीं देंगे', फडणवीस की दो टूक

Fadnavis
ANI
अंकित सिंह । Mar 31 2025 2:34PM

नागपुर में पत्रकारों से बात करते हुए फडणवीस ने कहा कि कानून के दायरे से बाहर संरचनाओं को हटा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम औरंगजेब को पसंद करें या न करें, उनकी कब्र संरक्षित स्मारक है। हम किसी को भी उनका महिमामंडन नहीं करने देंगे।

औरंगजेब विवाद के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक बार फिर से बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि लोग मुगल बादशाह औरंगजेब को पसंद करें या न करें, उनकी कब्र संरक्षित स्मारक है, लेकिन उनका महिमामंडन नहीं होने दिया जाएगा। नागपुर में पत्रकारों से बात करते हुए फडणवीस ने कहा कि कानून के दायरे से बाहर संरचनाओं को हटा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "हम औरंगजेब को पसंद करें या न करें, उनकी कब्र संरक्षित स्मारक है। हम किसी को भी उनका महिमामंडन नहीं करने देंगे।"

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आपको बता दें कि दक्षिणपंथी संगठन छत्रपति संभाजीनगर जिले के खुल्ताबाद कस्बे में 17वीं सदी के मुगल शासक के मकबरे को हटाने की मांग कर रहे हैं। इस महीने की शुरुआत में नागपुर में विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा कब्र को हटाने की मांग को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान पवित्र शिलालेखों वाली चादर को जलाने की अफवाहों के कारण हिंसा भड़क उठी थी। वहीं, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने औरंगजेब की कब्र को लेकर कथित तौर पर सांप्रदायिक तनाव भड़काने के प्रयासों की रविवार को निंदा की और कहा कि इतिहास को जाति और धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से इतिहास से जुड़ी जानकारियों के लिए व्हाट्सऐप पर आने वाले संदेशों पर निर्भर न रहने को कहा। 

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ठाकरे ने यहां शिवाजी पार्क में वार्षिक गुड़ी पड़वा रैली को संबोधित करते हुए कहा कि मुगल शासक ‘‘एक विचार को मारना चाहते थे और वह है शिवाजी’ लेकिन असफल रहे। उन्होंने कहा कि बीजापुर के सेनापति अफजल खान को प्रतापगढ़ किले के पास दफनाया गया था और यह छत्रपति शिवाजी महाराज की अनुमति के बिना संभव नहीं था। ठाकरे ने लोगों से उकसावे में नहीं आने और विचलित न होने का आग्रह करते हुए कहा कि शिवाजी से पहले और शिवाजी के बाद के युगों में सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियां भिन्न थीं।

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