Gujarat में जन्मे Rajeev Chandrasekhar को Modi-Shah की जोड़ी ने Kerala की राजनीति में क्यों उतार दिया?

हम आपको बता दें कि 60 वर्षीय चंद्रशेखर के पास दो दशक का राजनीतिक अनुभव है। वह इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, कौशल विकास और उद्यमिता तथा जल शक्ति विभागों के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।
केरल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले अपनी पार्टी संगठन में नई जान फूंकते हुए भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर को राज्य में पार्टी की कमान सौंप दी है। हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पसंद राजीव चंद्रशेखर को भाजपा की केरल इकाई का नया अध्यक्ष चुना गया है। पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक प्रह्लाद जोशी ने भाजपा की राज्य परिषद की बैठक के दौरान यह घोषणा की। चंद्रशेखर शीर्ष पद के लिए एकमात्र उम्मीदवार थे और उन्होंने रविवार को भाजपा मुख्यालय में इस पद के लिए दो नामांकन पत्र दाखिल किए थे। आज जब उनके निर्वाचन की घोषणा की गयी उस समय निवर्तमान अध्यक्ष के. सुरेंद्रन और प्रदेश इकाई के प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर सहित राज्य में भाजपा के सभी प्रमुख नेता मौजूद थे। सुरेंद्रन ने मंच पर चंद्रशेखर को पार्टी का झंडा सौंपा। सुरेंद्रन ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले 10 साल में भाजपा ने केरल में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर को सभी पार्टी नेताओं ने शीर्ष पद के लिए सर्वसम्मति से चुना है तथा विभिन्न क्षेत्रों में उनका अनुभव एवं विशेषज्ञता राज्य में भाजपा की प्रगति को गति प्रदान करेगी। पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्रन ने कुछ लोगों द्वारा की जा रही इस आलोचना को भी खारिज किया कि चंद्रशेखर एक नियमित नेता नहीं हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि वह अपनी नयी भूमिका में चमकेंगे।
हम आपको बता दें कि 60 वर्षीय चंद्रशेखर के पास दो दशक का राजनीतिक अनुभव है। वह इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, कौशल विकास और उद्यमिता तथा जल शक्ति विभागों के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने तीन बार कर्नाटक से राज्यसभा सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में अपनी सेवा दी है। वह राजग की केरल इकाई के उपाध्यक्ष थे। केरल में चर्चित चेहरा चंद्रशेखर ने राजग प्रत्याशी के रूप में तिरुवनंतपुरम से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन वह कांग्रेस के शशि थरूर से 16,077 मतों के अंतर से हार गए थे। हम आपको बता दें कि गुजरात के अहमदाबाद में केरल मूल के परिवार में जन्मे चंद्रशेखर का त्रिशूर से पारिवारिक नाता है। उनके ससुर टीपीजी नांबियार बीपीएल समूह के संस्थापक हैं।
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राजीव चंद्रशेखर ने जब से तिरुवनंतपुरम से चुनाव लड़ा है, तब से वे राज्य की राजनीति पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और राज्य की राजधानी के प्रमुख मुद्दों को उठाते हैं। बताया जा रहा है कि वे राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर राज्य की राजनीति पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। ऐसी रिपोर्टें हैं कि चंद्रशेखर भाजपा की केरल इकाई का नेतृत्व करने के लिए ज्यादा उत्सुक नहीं थे। इसके बारे में सूत्रों का कहना है कि उनकी असली हिचकिचाहट उनके व्यापक व्यवसाय के चलते उनकी व्यस्तता थी। रविवार को वह एक अंतरराष्ट्रीय एआई सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया जाने वाले थे तभी उन्हें पार्टी हाईकमान का निर्देश मिला कि केरल जाकर भाजपा अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करें। इसके बाद शाम को उन्होंने तिरुवनंतपुरम पहुँच कर भाजपा की एक कोर कमेटी की बैठक के बाद अपना नामांकन दाखिल किया। इस कार्यक्रम में मौजूदा भाजपा राज्य प्रमुख के. सुरेंद्रन, केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी और जॉर्ज कुरियन, पूर्व केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन, राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के सदस्य पीके कृष्णदास और कुम्मनम राजशेखरन मौजूद थे।
हम आपको बता दें कि चंद्रशेखर की नियुक्ति को भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। एक तो चंद्रशेखर की छवि विकासवादी राजनेता की है और केरल के युवा उनको पसंद करते हैं जिसका फायदा आगामी केरल विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिल सकता है दूसरा राजीव चंद्रशेखर का नेतृत्व भाजपा की केरल इकाई के भीतर गुटबाजी पर लगाम लगाने में भी मदद कर सकता है। चंद्रशेखर ने अपनी नियुक्ति से ठीक पहले जिस तरह समाज सुधारक श्री नारायण गुरु को याद किया वह दर्शाता है कि राज्य की राजनीति में 'हिंदुत्व' मुद्दा प्रमुखता से छाने वाला है। हम आपको बता दें कि चंद्रशेखर ने ‘एक्स’ पर लिखा, “शिक्षा के माध्यम से प्रबुद्ध बनें, संगठन के माध्यम से मजबूत बनें, और कड़ी मेहनत के माध्यम से समृद्ध बनें।- श्री नारायण गुरु के विचार।” उन्होंने पिछली सदी में जाति व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाले गुरु की तस्वीर भी पोस्ट की। उल्लेखनीय है कि नारायण गुरु का परिवार केरल की प्रभावशाली एझावा जाति से था। हम आपको यह भी याद दिला दें कि कुछ समय पहले केरल के मुख्यमंत्री विजयन ने संत और समाज सुधारक श्री नारायण गुरु को सनातन धर्म के समर्थक के रूप में चित्रित करने के ‘‘संगठित प्रयासों’’ के खिलाफ आगाह किया था। मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने कहा था कि अपनी टिप्पणी के माध्यम से मुख्यमंत्री ने सनातन धर्म और श्री नारायण गुरु के अनुयायियों का अपमान किया है।
हम आपको यह भी बता दें कि पिछले लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल में काफी चुनाव प्रचार किया था और अपने कई बड़े नेताओं को राज्य से लोकसभा चुनाव लड़ाया था। केरल में मजबूती से चुनाव लड़ने का फायदा यह हुआ था कि पार्टी ने केरल में त्रिशूर सीट जीत कर पहली बार अपना खाता खोल लिया था। लोकसभा चुनावों में पिछली बार के मुकाबले भाजपा के वोट प्रतिशत में भी इजाफा हुआ था इसलिए भाजपा का प्रयास है कि अब जब चुनावों में एक साल रह गया है तब पार्टी को और मजबूत कर जनता के मुद्दे उठाये जायें ताकि वह लेफ्ट फ्रंट से सीधी टक्कर लेने की स्थिति में आ सके। दरअसल राज्य में कांग्रेस कई गुटों में बंटी हुई है इसका फायदा भी भाजपा अपनी एकजुटता से उठाना चाहती है। भाजपा ने रणनीति के तहत ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी केरल से दो मंत्री बनाये हुए हैं। वैसे इसमें कोई दो राय नहीं कि दस साल से राज्य की सत्ता में मौजूद वाममोर्चा के खिलाफ राज्य में माहौल तो बन रहा है लेकिन देखना होगा कि राजीव चंद्रशेखर के नेतृत्व में भाजपा इसे अपने लिए एक अवसर के रूप में कैसे बदल पाती है? लोगों की नजरें अब इस बात पर भी लगी रहेंगी कि क्या देश का एक बड़ा बिजनेसमैन जमीनी राजनीति में सफल हो पायेगा और क्या भगवान का अपना देश कहे जाने वाले राज्य केरल में कमल का कमाल दिख पायेगा?
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