दिल्ली चुनाव में हरि नगर सीट पर आप का खेल बिगाड़ सकते हैं Harsharan Singh Balli, चार बार रह चुके हैं विधायक

Harsharan Singh Balli
प्रतिरूप फोटो
ANI
Anoop Prajapati । Dec 18 2024 7:04PM

विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों में बड़ा लगातार बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। बीते नबंवर में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सरदार हरशरण सिंह बल्ली अपने बेटे सरदार गुरमीत सिंह बल्ली के साथ एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।

दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों में बड़ा लगातार बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। बीते नबंवर में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सरदार हरशरण सिंह बल्ली अपने बेटे सरदार गुरमीत सिंह बल्ली के साथ एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। बल्ली परिवार का यह कदम AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है और भाजपा के लिए संभावित रूप से एक मजबूती का संकेत। सरदार हरशरण सिंह बल्ली का दिल्ली की राजनीति में लंबा अनुभव है।

भाजपा नेता बल्ली हरि नगर सीट से चार बार विधायक रहे हैं और मदन लाल खुराना की कैबिनेट में विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों जैसे उद्योग, श्रम, जेल, भाषा, और गुरुद्वारा प्रशासन का कार्यभार संभाल चुके हैं। 2013 में भाजपा से टिकट न मिलने पर उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और विधानसभा चुनाव लड़ा। जिसमें वे AAP उम्मीदवार से चुनाव हार गए थे। इसके बाद वे 2020 में AAP में शामिल हुए थे।

बल्ली की 4 साल बाद घर वापसी

भाजपा में बल्ली की वापसी करीब चार साल बाद हुई है। जनवरी 2020 में उन्होंने तत्कालीन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की मौजूदगी में भगवा पार्टी छोड़कर आप में शामिल हो गए थे। बल्ली 1993 से 2013 तक हरि नगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे और दिल्ली में मदन लाल खुराना की सरकार के दौरान औद्योगिक मंत्री भी रहे। 

राजनीतिक सफर

दिल्ली में उन्हें एक कद्दावर भाजपा नेता और स्वतंत्रता सेनानी परिवार के बेटे और दिल्ली के इतिहास में एकमात्र सिख के रूप में वर्णित किया जा सकता है, जिन्हें लगातार 4 बार विधानसभा के सदस्य के रूप में चुना गया है और वे दिल्ली नगर निगम के सदस्य रहे हैं और दिल्ली में 3 मुख्यमंत्रियों मदन लाल खुराना, साहिब सिंह वर्मा और सुषमा स्वराज के अधीन मंत्री के रूप में कार्य किया है। साथ ही वे 6 साल तक आश्वासन समिति के अध्यक्ष भी रहे। पहली विधानसभा के बाद से वे चुनावों में प्रमुख विजेता रहे हैं और 1993 से 2013 तक 20 वर्षों तक विधायक रहे हैं। वे भाजपा सिख सेल के संस्थापक भी थे। वे विश्व पंजाबी संगठन की संचालन समिति के सदस्य हैं।

आप के लिए बड़ा झटका

विधानसभा चुनाव से पहले AAP को बड़ा झटका इस कदम से AAP को कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में अपने प्रभाव को बनाए रखने में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। जबकि भाजपा के लिए यह कदम चुनावी तैयारियों में एक मजबूत निर्णय के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव नजदीक आने के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन नेताओं का पार्टी बदलना किस प्रकार से आगामी विधानसभा चुनाव के परिणामों को प्रभावित करता है अंततः सरदार हरशरण सिंह बल्ली और उनके बेटे का AAP से BJP में शामिल होना। दिल्ली चुनावों के परिप्रेक्ष्य में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। यह घटना न केवल दिल्ली के राजनीतिक परिदृश्य में चल रहे बदलावों का प्रतीक है। बल्कि आगामी चुनावों में विभिन्न दलों की चुनावी संभावनाओं पर भी प्रभाव डालेगी।

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