K Chandrashekar Rao Birthday: 71 साल के हुए तेलंगाना के पूर्व CM के चंद्रशेखर राव, कांग्रेस के साथ शुरू किया था सियासी सफर

आज यानी की 17 फरवरी को तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री कल्वाकुंतला चंद्रशेखर राव अपना 71वां जन्मदिन मना रहे हैं। संजय गांधी के मार्गदर्शन में आंध्र प्रदेश युवा कांग्रेस से अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत की थी।
भारत राष्ट्र समिति के नेता और तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री कल्वाकुंतला चंद्रशेखर राव आज यानी की 17 फरवरी को अपना 71वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनको केसीआर के नाम से भी जाना जाता है। साल 1980 में उन्होंने संजय गांधी के मार्गदर्शन में आंध्र प्रदेश युवा कांग्रेस से अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत की थी। पहले उनकी पार्टी का नाम तेलंगाना राष्ट्र समिति पार्टी था। उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखने के लिए पार्टी का नाम बदलकर भारत राष्ट्र समिति कर दिया है। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर के चंद्रशेखर राव के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और शिक्षा
तेलंगाना के चंतामदका में 17 फरवरी 1954 को के चंद्रशेखर राव का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम राघवार राव और मां का नाम वेंकटम्मा था। केसीआर ने उस्मानिया यूनिवर्सिटी हैदराबाद से एमए की पढ़ाई की है।
राजनीति में कदम
छात्र राजनीति से केसीआर ने अपनी सियासी पारी शुरू की थी। दरअसल, सिद्धिपेट डिग्री कॉलेज में पढ़ाई के दौरान छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था। लेकिन इस चुनाव में इनको हार मिली थी। डिग्री कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद वह दिल्ली की सियासय करना चाहते थे। इसके लिए केसीआर दिल्ली भी गए, तब साल 1975 था देश में आपातकाल लग गया था। इस दौरान वह संजय विचार मंच में शामिल हो गए, लेकिन संजय गांधी की मौत के बाद वह सिद्धिपेट लौट गए।
बताया जाता है कि एक बार सीएम मैरी चेन्ना रेड्डी एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए सिद्धिपेट गए थे। उस दौरान केसीआर ने भी मंच से भाषण दिया था। केसीआर का भाषण सुन सीएम रेड्डी ने कहा कि यह युवक अच्छा भाषण दे रहा है, इसको मंच से बोलने दो।
सियासी पारी
साल 1980 में संजय गांधी के मार्गदर्शन में के चंद्रशेखर राव आंध्र प्रदेश युवा कांग्रेस में शामिल हो गए। फिर साल 1982 में राघवपुर प्राथमिक कृषि सहकारी समिति सिद्धिपेट के अध्यक्ष बने। इसके बाद वह युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी बने, लेकिन जल्द ही वह कांग्रेस से अलग हो गए। फिर वह सिद्धिपेट से विधायक बने और साल 1987 में राज्य मंत्री बनें। साल 1989 में वह एक बाद फिर सिद्धिपेट से विधायक बनें।
साल 1989 से 1993 तक वह टीडीपी के जिला अध्यक्ष रहे और साल 1993 में के चंद्रशेखर राव को टीडीपी का राज्य सचिव बनाया गया। वह सियासत में लगातार ऊंचा मुकाम हासिल कर रहे थे। साल 1997 में केसीआर को आंध्र प्रदेश सरकार में परिवहन मंत्री बनाए गए। फिर साल 1999 में वह विधानसभा के उपसभापति बनें। लेकिन साल 2001 में केसीआर ने विधायक और उपसभापति पद से इस्तीफा दे दिया।
टीआरएस की स्थापना
के चंद्रशेखर ने अलग तेलंगाना राज्य की मांग शुरूकर दी और उन्होंने टीडीपी से इस्तीफा दे दिया। फिर साल 2001 में केसीआर ने तेलंगाना राष्ट्र समिति का गठन किया। साल 2004 में टीआरएस ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया और लोकसभा की 5 और विधानसभा की 26 सीटों पर जीत पाई। वहीं केसीआर ने खुद करीमनगर से चुनाव लड़ा और संसद पहुंच गए। इसके बाद उनको केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किया गया। वहीं साल 2006 में उन्होंने संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद हुए उपचुनाव में उन्होंने फिर जीत हासिल की।
केसीआर की भूख हड़ताल
तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर आंदोलन तेज हुआ और के चंद्रशेखर ने आमरण अनशन पर बैठने का फैसला किया। फिर अक्तूबर 2009 में केसीआर ने आमरण अनशन शुरू किया। वहीं 09 दिसंबर को केंद्र सरकार ने तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया। इस दौरान रायलसीमा और सीमांध्र के सांसदों और विधायकों ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 18 फरवरी 2014 को लोकसभा से तेलंगाना का विधायक पास हुआ और तमाम प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 02 जून 2014 को तेलंगाना राज्य बना।
सीएम बने केसीआर
साल 2014 में तेलंगाना राज्य अस्तित्व में आया और 02 जून को के चंद्रशेखर राव ने तेलंगाना के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
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