विदेश मंत्रियों की चर्चा से खुली कैलाश मानसरोवर यात्रा की राह

S Jaishankar Wang Yi
ANI

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानों के साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर सार्थक चर्चा की है। इसका असर इसी साल की गर्मियों में दिखेगा, जब भारतीय श्रद्धालु कैलाश-मानसरोवर की यात्रा पर जाएंगे।

दक्षिणी अफ्रीकी शहर जोहान्सबर्ग में यूं तो जी 20 के विदेश मंत्रियों की बैठक चल रही है। इसमें अलग हटकर अगर एशिया के दो महत्वपूर्ण, ताकतवर और पड़ोसी देशों चीन और भारत के विदेश मंत्रियों की मुलाकात होगी तो उस पर कूटनीतिक हलकों की नजर जाना स्वाभाविक है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी की मुलाकात को दोनों ही देशों में उम्मीद से देखा जा रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानों के साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर सार्थक चर्चा की है। इसका असर इसी साल की गर्मियों में दिखेगा, जब भारतीय श्रद्धालु कैलाश-मानसरोवर की यात्रा पर जाएंगे। यहां ध्यान देने की बात यह है कि जब से दोनों देशों के आपसी रिश्तों में असहजता आई थी, तब से कैलाश-मानसरोवर यात्रा रूकी हुई है। इस यात्रा के शुरू होने के गहरे मायने हैं। इसका मतलब यह है कि भारतीय श्रद्धालु अपने तीर्थ स्थल की यात्रा ही नहीं करेंगे, वैश्विक स्तर पर सौहार्द का संदेश भी लेकर जाएंगे। 

चीन के विदेश मंत्री वांग यी से भारतीय विदेश मंत्री की मुलाकात कितनी अहम है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुलाकात की जानकारी खुद भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखकर दी। एस जयशंकर ने लिखा कि जोहान्सबर्ग में जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले सीपीसी पोलित ब्यूरो के सदस्य और चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मिलने का अवसर मिला।

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गौरतलब है कि इसके पहले दोनों नेता ब्राजील में 18 नवंबर 2024 को मिले थे और आपसी संबंधों पर आगे बढ़ने को लेकर चर्चा की थी। इसके बाद ही दोनों देशों के बीच रिश्तों में जमी बर्फ के पिघलने के आसार बढ़ने लगे थे। इसका असर इसी साल जनवरी में पहली बार दिखा, जब भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने 26 और 27 जनवरी को चीन का दौरा किया और चीन के अधिकारियों में भेंट-मुलाकात की। इसका जिक्र करते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का कहना कि दोनों मंत्रियों ने इस बैठक के दौरान खास तौर पर सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द प्रबंधन पर विशेष जोर दिया। इसके साथ ही  दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के साथ ही, कैलाश मानसरोवर यात्रा, सीधी उड़ान के जरिए कनेक्टिविटी की बहाली और दोनों देशों के आपसी यात्रियों की सहूलियतों को बढ़ाने पर चर्चा हुई। 

वैसे देखें तो दोनों देशों के बीच आपसी रिश्तों को बेहतर बनाने और नई सदी के अनुरूप ढालने की दिशा में जमीनी स्तर पर काम करने की भूमिका पिछले साल अक्टूबर में रूसी शहर कजान में हुई चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आपसी बैठक के साथ बननी शुरू हुई। इसके बाद से ही चीन और भारत अपनी वैश्विक उपस्थिति और महत्ता को समझने लगे हैं। शायद यही वजह है कि जोहान्सबर्ग में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने आपसी बैठक में उस जी-20 को लेकर भी चर्चा की,, जिसकी बैठक में शामिल होने दोनों गए हैं। इसके साथ ही आपस के लिए बेहद अहम शंघाई सहयोग संगठन को लेकर भी वैचारिक आदान-प्रदान हुआ।

दोनों विदेश मंत्रियों की आपसी चर्चा के बाद 2025 की गर्मियों में कैलाश मानसरोवर यात्रा की शुरूआत होने जा रही है। लेकिन यात्रा का तंत्र क्या होगा और उसके तरीके क्या होंगे, इसे लेकर अभी फाइनल स्तर पर बात नहीं बनी है। हालांकि माना जा रहा है कि दोनों देशों के अधिकारी इस बारे में मिलकर चर्चा करेंगे और तंत्र बनाने को लेकर जल्द ही आखिरी स्तर पर पहुंचा जा सकेगा। यहां यह भी ध्यान रखना है कि भारत की ओर से हर साल जून और सितंबर के बीच उत्तराखंड में लिपुलेख और सिक्किम के नाथू ला दर्रे के जरिए केएमवाई का आयोजन किया जाता है। यह भी ध्यान देना चाहिए कि 2020 में आई कोरोना महामारी और कुछ दूसरी वजहों से दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें रोक दी गईं। माना जा रहा है कि जयशंकर और वांग यी की मुलाकात के बाद ये उड़ाने फिर से शुरू हो सकेंगी। बंद होने से पहले दोनों देशों के बीच हर महीने 539 सीधी उड़ानों के जरिए करीब 1.25 लाख से ज्यादा यात्रियों की दोनों तरफ आवाजाही थी। माना जा रहा है कि ये सेवा जल्द शुरू होगी और अब इससे ज्यादा यात्रियों की हर महीने दोनों देशों के बीच आवाजाही होगी।

-उमेश चतुर्वेदी

लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तम्भकार हैं

(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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