Digi yatra और Rat Hole माइनिंग के बारे में कितना जानते हैं आप, आज संसद में हुआ जिक्र

सरकार ने सोमवार को बताया कि हवाई अड्डों पर यात्रियों को परेशानी रहित यात्रा के लिए एक दिसंबर 2022 को शुरू की गई ‘डिजी यात्रा’ सुविधा अब 24 हवाई अड्डों पर उपलब्ध है और इसे चरणबद्ध आधार पर देश भर के सभी हवाई अड्डों पर आरंभ किया जाएगा।
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण चल रहा है। आज संसद के दोनों सदनों में जबरदस्त तरीके से हंगामा देखने को मिला। हालांकि, लोकसभा में कुछ काम काज जरूर हुए हैं। इन सबके बीच आज सदन में दो ऐसे शब्दों का जिक्र किया गया इसके बारे में हम आपको आसानी से बताते हैं। पहलेा है डिजी यात्रा और दूसरा है Rat Hole माइनिंग।
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कैसे हुआ जिक्र
सरकार ने सोमवार को बताया कि हवाई अड्डों पर यात्रियों को परेशानी रहित यात्रा के लिए एक दिसंबर 2022 को शुरू की गई ‘डिजी यात्रा’ सुविधा अब 24 हवाई अड्डों पर उपलब्ध है और इसे चरणबद्ध आधार पर देश भर के सभी हवाई अड्डों पर आरंभ किया जाएगा। राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस सुविधा की शुरुआत दिल्ली, बेंगलुरु और वाराणसी हवाई अड्डों पर की गई थी।
असम में छह जनवरी 2025 को दीमा असाओ जिले के उमरंगसो में हुई खदान दुर्घटना के बाद चल रही जांच के तहत राज्य में अब तक कुल 245 अवैध ‘‘रैट होल’’ खानें चिह्नित कर उन्हें सील कर दिया गया है। कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
डिजी यात्रा क्या है?
इसमें कोई दो राय नहीं है कि केंद्र सरकार लगातार यात्रा का सुगम बनाने की कोशिश कर रही है। हवाई यात्रा को सुगम बनाने के लिए डिजी यात्रा ऐप लाया गया है। इसके इस्तेमाल से यात्री को हवाई अड्डे पर लगने वाली लंबी कतारों से राहत मिलेगी। इसके अलावा बार-बार दस्तावेजों को दिखाना नहीं पड़ेगा। इतना ही नहीं, एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी और स्कैनिंग में लगने वाले टाइम में भी बचत होगी। इसकी शुरुआत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने की थी। ऐप पर रजिस्ट्रेशन होने के बाद यात्री कागज के बिना और संपर्क रहित तरीके से हवाई अड्डे के टर्मिनलों पर विभिन्न चेक पॉइंट से यात्रा कर सकेंगे।
‘डिजी यात्रा’ में डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए डिजी यात्रा सेंट्रल इकोसिस्टम (डीवाईसीई) को गोपनीयता के मूल सिद्धांतों पर तैयार किया गया है। इसके तहत यात्री के स्मार्टफोन वालेट में संग्रहित डेटा केवल मूल हवाई अड्डे के साथ सीमित अवधि के लिए साझा किया जाता है जहां यात्री को अपनी पहचान यानी आईडी की पुष्टि करनी होती है। धीरे-धीरे इसका देश के अन्य शहरों में विस्तार हो रहा है। लेकिन हवाई चप्पल वालों के लिए हवाई जहाज के सफर को आसान करने की बात हुई थी। हालांकि, इस दिशा में कितना काम हुआ है, इस पर सवाल बना हुआ है।
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Rat Hole माइनिंग
रैट होल माइनिंग तकनीक का इस्तेमाल अक्सर कोयला खदानों में किया जाता है। इसे विवादास्पद के साथ-साथ खतरनाक भी माना जाता है। कई जगह इसके जरिए अवैध खनन भी होती है। रैट होल माइनिंग में खुदाई छेनी-हथोड़ों से की जाती है। पूर्वोत्तर में यह तकनीक काफी चर्चाओं में रहता है। इस तकनीक में 4 फीट से भी कम चौड़ा गड्ढा खोदा जाता है। इसके जरिए जब कोयला एक बार निकल जाता है तो उसके बगल में सुरंगे खोद दी जाती है। यह पूरा का पूरा तरीका खतरनाक होता है। मेघालय और असम में यह हजारों की संख्या में है। हाल में हीं असम के दीमा हसाओ में बड़ा हादसा हुआ था जिसमें 18 मजदूर फंस गए थे। सरकार को इस तकनीक पर जल्द से लगाम लगाने की जरूरत है। लोग इसके जरिए खुदाई ना करें, इसको लेकर जागरूकता पैदा करने की भी आवश्यकता है।
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