By अभिनय आकाश | Mar 28, 2025
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। उनके सरकारी आवास पर कथित तौर पर अवैध नकदी मिलने का मामला सामने आया है। जस्टिस वर्मा के घर में आग लगने की घटना के बाद वहां से नकदी की बोरियां बरामद की गई थीं। जस्टिस अभय ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की और कहा कि आंतरिक जांच पूरी होने दीजिए। पीठ ने कहा कि अगर आंतरिक जांच में उन्हें (जस्टिस यशवंत वर्मा) दोषी पाया जाता है तो सीजेआई के पास एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने या सरकार से उन्हें हटाने की सिफारिश करने का विकल्प होगा। इस मामले में आज हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। फिलहाल आंतरिक जांच चल रही है। याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद कई विकल्प हो सकते हैं। सीजेआई ने 22 मार्च को जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोपों की आंतरिक जांच करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त तीन सदस्यीय इन-हाउस कमेटी इस सप्ताह जस्टिस वर्मा से मुलाकात कर सकती है। सूत्रों ने बताया कि बैठक से पहले यशवंत वर्मा ने वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल, मेनका गुरुस्वामी, अरुंधति काटजू और वकील तारा नरूला से कानूनी राय मांगी, जो उनके लुटियंस दिल्ली स्थित आवास पर गए थे। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कमेटी ने मंगलवार को जस्टिस वर्मा के 30, तुगलक क्रिसेंट स्थित आवास का दौरा किया, क्योंकि इसने उनके खिलाफ आरोपों की जांच शुरू कर दी है।
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जी एस संधावालिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति अनु शिवरामन करीब 30-35 मिनट तक जस्टिस वर्मा के आवास के अंदर रहे। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा को उनके मूल इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वापस भेजने की सिफारिश की थी, जिन्हें भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना के निर्देश के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने पद से हटा दिया है।