By अनन्या मिश्रा | Mar 31, 2025
19वीं सदी का समय भारत के लिए बहुत सारे बदलावों का दौर माना जाता है। इस दौर में बहुत सारे समाज सुधारक आंदोलन हुए और इसमें नारी शिक्षा और विधवा विवाह जैसे कार्यों को प्रोत्साहित किया गया। जिस दौर में लड़कियों का शिक्षित होना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी। उस समय देश की एक लड़की ने अनोखी कहानी लिख दी। आनंदी गोपाल जोशी ने उस दौर में डॉक्टर बन लड़कियों और महिलाओं को प्रेरित करने का काम किया था। बता दें कि आज ही के दिन यानी की 31 मार्च को भारत की पहली महिला डॉक्टर आनंदी गोपाल जोशी का जन्म हुआ था। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर आनंदी गोपाल जोशी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
पुणे में 31 मार्च 1865 को आनंदी गोपाल जोशी का जन्म हुआ था। उस दौरान उनकी उम्र सिर्फ 9 साल की थी, जब आनंदी की शादी हो गई थी। इनके पति गोपालराव उनसे उम्र में 16 साल बड़े थे। वहीं महज 14 साल की उम्र में आनंदी एक बच्चे की मां बन गईं। लेकिन महज 10 दिन के अंदर बच्चे की बीमारी की वजह से मौत हो गई। इसके बाद आनंदी गोपाल जोशी ने निश्चय किया कि वह किसी भी बच्चे को बीमारी से मरने नहीं देंगी।
पति ने शिक्षा के लिए किया प्रोत्साहित
आनंदी गोपाल जोशी को शिक्षित करने के लिए पति गोपालराव ने बहुत सपोर्ट किया। उन्होंने अपनी पत्नी आनंदी को पढ़ाई के लिए मिशनरी स्कूल भेजा और साल 1980 में गोपालराव ने अमेरिका के मिशनरी को लेटर भेजकर अमेरिका में डॉक्टरी की पढ़ाई की जानकारी हासिल की। परिवार वालों और समाज की असहमति के बाद भी आनंदी गोपाल जोशी ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। वहीं अपने सारे गहने बेचकर पेंसिल्वेनिया के महिला मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया।
एमडी की डिग्री
बता दें कि महज 19 साल की उम्र में आनंदी गोपाल जोशी ने एमडी की डिग्री हासिल कर ली थी। वह पहली भारतीय महिला थीं, जिनको यह डिग्री मिली थी। भारत लौटने के बाद वह कोल्हापुर रियासत के अल्बर्ट एडवर्ड अस्पताल के महिला वार्ड में डॉक्टर इन-चार्ज की पोस्ट पर काम करने लगीं। हालांकि डॉक्टरी की प्रैक्टिस के दौरान आनंदी गोपाल जोशी टीबी का शिकार हो गईं।
मृत्यु
वहीं 26 फरवरी 1887 को आनंदी गोपाल जोशी का निधन हो गया था।