Trump के फेंटानिल तस्करी वाले नए आरोपों के बीच भारत-चीन की बड़ी बैठक, अमेरिका को लगेगा 440 वोल्ट का झटका

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ANI
अभिनय आकाश । Mar 27 2025 1:39PM

रिपोर्ट को अमेरिकी खुफिया प्रमुख तुलसी गैबार्ड के कार्यालय से जारी किया गया। जारी किए गए 2025 वार्षिक खतरा आकलन (एटीए) ने संयुक्त राज्य अमेरिका में चल रहे फेंटेनाइल संकट को बढ़ावा देने वाली सामग्रियों की आपूर्ति में इन देशों की बढ़ती भूमिका को बताया।

एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनियाभर में जाकर टैरिफ की धमकी दे रहे हैं। इसकी जद में चीन सबसे ऊपर है। लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि भारत इससे अछूता है। भारत पर भी इसका असर बराबर पड़ेगा। लेकिन टैरिफ से इतर अब अमेरिका में हजारों जिंदगियां लील चुके फेंटानिल नाम की घातक ड्रग को लेकर अब अमेरिका ने नए दावे किए हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसी की ताजा रिपोर्ट में अब उंगलियां भारत की तरफ भी उठाई गई हैं। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के प्रतिशोधात्मक टैरिफ लागू होने में बस एक सप्ताह बचा है, ऐसे में अमेरिका ने अब भारत को चीन के साथ मिलकर ड्रग तस्करों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले प्रीकर्सर रसायनों और उपकरणों की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आपूर्ति को सक्षम करने में एक मुख्य प्लेयर के रूप में नामित किया है। 

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इस रिपोर्ट को अमेरिकी खुफिया प्रमुख तुलसी गैबार्ड के कार्यालय से जारी किया गया। जारी किए गए 2025 वार्षिक खतरा आकलन (एटीए) ने संयुक्त राज्य अमेरिका में चल रहे फेंटेनाइल संकट को बढ़ावा देने वाली सामग्रियों की आपूर्ति में इन देशों की बढ़ती भूमिका को बताया। रिपोर्ट के अनुसार, फेंटेनाइल और अन्य सिंथेटिक ओपिओइड अमेरिका में तस्करी की जाने वाली सबसे घातक दवाएँ हैं, जो अक्टूबर 2024 को समाप्त होने वाली 12 महीने की अवधि में 52,000 से अधिक मौतों के लिए जिम्मेदार हैं। ट्रम्प प्रशासन ने फेंटेनाइल की तस्करी पर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है और यहां तक ​​कि कुछ देशों के साथ व्यापार नीतियों को अवैध दवा आपूर्ति श्रृंखला में उनकी भूमिका से जोड़ दिया है, हालांकि यह पहली बार है जब वाशिंगटन ने फेंटेनाइल जैसे ओपिओइड के निर्माण के लिए ड्रग कार्टेल द्वारा उपयोग किए जाने वाले अग्रदूत रसायनों की आपूर्ति के संबंध में नई दिल्ली को बीजिंग के समान स्तर पर रखा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत भी फेंटानिल और उसकी निर्माण सामग्री का बड़ा सप्लायर्स बन चुका है। हालांकि, इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि भारत से अमेरिका में अवैध रूप से यह ड्रग कैसे पहुंच रहा है। 

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अब अमेरिका के राष्ट्रपति के इसी तरह के तेवरों के बीच भारत और चीन के बीच एक बैठक हुई, जिसने अमेरिका को हैरान कर दिया है। भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए बड़े मुद्दों पर बातचीत हुई। बड़ी बात ये है कि गंभीर विषयों को ध्यान में रखते हुए ये  बैठक काफी सार्थक भी साबित हुई। दोनों देशों के बीच ये बैठक ऐसे समय में हुई है जब डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर से दुनियाभर में तनाव मचा हुआ है। तब जब चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत के साथ व्यापारिक साझेदारी को बढ़ाने  और मजबूत करने की पेशकश तक कर चुके हैं। चीन चाहता है कि टैरिफ के इस वॉर का सामना करने के लिए भारत उसे सहयोग दे। इन सभी गठजोड़ के बीच भारत और चीन के बीच बातचीत हुई। हालांकि बातचीत व्यापार को लेकर नहीं थी। इस बार पुराने विवादों को सुलझाने के लिए इस बैठक को बुलाया गया। दोनों पक्षों के बीच सीमा पर तनाव को लेकर बातचीत की। दोनों ने समाधान की तरफ बातचीत की। भारत और चीन ने तनाव को कम करने से लेकर सीमा पार नदियों औऱ कैलाश मानसरोवर यात्रा समेत सीमा पार सहयोग को जल्द से जल्द बहाल करने पर भी जोर दिया। 

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