BJP के गढ़ माने जाने वाले Wardha में शरद पवार ने की सेंधमारी, पार्टी को विधानसभा चुनाव में वापसी की उम्मीद

By Anoop Prajapati | Sep 20, 2024

महाराष्ट्र का महत्वपूर्ण एक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र वर्धा है। जहां हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) गुट के अमर शरदराव काले ने बीजेपी के 10 साल के वर्चस्व को समाप्त करते हुए जीत हासिल की है। जिला मुख्यालय होने के चलते ज्यादातर बड़े सरकारी दफ्तर यहीं पर हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आश्रम के कारण यह क्षेत्र प्रसिद्ध है। वर्धा नदी और सतपुड़ा पर्वत श्रेणियों के नजदीक होने से यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से बेहद सुंदर है। विश्व शांति स्तूप यहां के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है। यहां के हिंगघाट और पुलगांव में सूती वस्त्र की मिलें हैं। यह कई बड़े शैक्षिक संस्थानों में राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय प्रमुख हैं।


यह लोकसभा क्षेत्र महाराष्ट्र के अमरावती और वर्धा जिलों के अंतर्गत आता है। जो धामणगांव, मोर्शी, अर्वी, देवली-पुलगांव, हिंगणघाट और वर्धा विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया है। जहां 2019 के विधानसभा चुनाव में चार सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल की थी। तो वहीं, एक सीट कांग्रेस और एक स्वाभिमानी पक्ष पार्टी के खाते में भी गई थी। 1952 में देश में हुए पहले आम चुनाव के साथ ही इस लोकसभा क्षेत्र की धामणगांव विधानसभा सीट पर चुनाव हुए थे। जिस पर अब तक सिर्फ भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच ही आमने-सामने का मुकाबला रहा है। 2019 में बीजेपी के प्रताप अदसाद ने कांग्रेस के 15 साल से विधायक वीरेंद्र जगतप को हराकर जीत दर्ज की थी। 


राज्य के गठन के साथ ही 1962 से अस्तित्व में आए मोर्शी विधानसभा क्षेत्र पर कांग्रेस ने 1967 से लेकर 1999 तक राज किया है। लेकिन उसके बाद पार्टी की यहां से वापसी नहीं हो सकी है। फिलहाल स्वाभिमानी पक्ष पार्टी के देवेंद्र भुयार इस विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उनके पहले बीजेपी के अनिल बोंदे भी यहां से विधायक रह चुके हैं। वर्धा लोकसभा क्षेत्र की अर्वी विधानसभा सीट पूरे महाराष्ट्र में राजनीतिक रूप से मजबूत काले परिवार के कारण जानी जाती है। यहां से कांग्रेस के शरद काले ने 1985 से लेकर 1999 तक लगातार चार बार जीत हासिल की थी। 2019 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर दादाराव केचे जीत दर्ज करने में सफल रहे थे। उनके पहले अर्वी से कांग्रेस के अमर सरदाराव काले विधानसभा के सदस्य थे।


कांग्रेस के सर्वाधिक मजबूत गढ़ों में से इस लोकसभा क्षेत्र की देवली विधानसभा सीट भी है। जहां पर पार्टी 1962 से लेकर अब तक सिर्फ 1967 और 1990 में ही चुनाव हारी है। कांग्रेस के दिग्गज नेता रंजीत कांबले पर क्षेत्र की जनता 1999 के बाद से लगातार पांच बार अपना भरोसा जता चुकी है। वर्धा लोकसभा क्षेत्र की हिंगणघाट विधानसभा सीट के मतदाताओं ने अब तक राज्य के सभी बड़े राजनीतिक दलों को अपनी सेवा करने का अवसर प्रदान किया है। वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के समीर कुनावर इस क्षेत्र की जनता की आवाज विधानसभा में उठा रहे हैं। उनके पहले शिवसेना के अशोक शिंदे हिंगणघाट क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। महाराष्ट्र राज्य की विधानसभा में 47 नंबर से जाने जानी वाली वर्धा विधानसभा सीट कांग्रेस के मजबूत नेता रहे प्रमोद शिंदे की वजह से जानी जाती है। उन्होंने इस क्षेत्र की जनता की 1978 से लेकर 2009 तक कुल छह बार सेवा की है। वर्तमान में बीजेपी के पंकज भैया यहां से तार दो बार से चुनाव जीत रहे हैं।

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