By नीरज कुमार दुबे | Mar 28, 2025
प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में इस सप्ताह भारत की ओर से की जाने वाली रक्षा खरीद, रूस-यूक्रेन युद्ध, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के श्रीलंका दौरे और चीनी सेना की ओर से इस्तेमाल की जा रही एआई तकनीक से जुड़े मुद्दों पर ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) के साथ चर्चा की गयी। पेश है विस्तृत साक्षात्कार-
प्रश्न-1. रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में 54 हजार करोड़ रुपये के सैन्य साजो सामान की खरीद को मंजूरी दी है। इसमें कौन-कौन से प्रमुख रक्षा उत्पाद शामिल हैं? इसके अलावा सीसीएस ने एटीएजीएस की खरीद के लिए 7,000 करोड़ रुपये के सौदे को मंजूरी दी है इसे कैसे देखते हैं आप? यहां सवाल यह भी है कि जब हम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की बात कर रहे हैं तब इतनी बड़ी सैन्य खरीद क्यों कर रहे हैं?
उत्तर- भारत ने 54,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के सैन्य साजो सामान की खरीद को मंजूरी दी है इसमें हवाई हमला चेतावनी और नियंत्रण विमान प्रणाली, टॉरपीडो और टी-90 टैंकों के लिए इंजन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि एक महत्वपूर्ण कदम के तहत रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने पूंजी अधिग्रहण प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में समय सीमा को कम करने के लिए दिशानिर्देशों को भी मंजूरी दी है, ताकि इसे अधिक तेज, अधिक प्रभावी और कुशल बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि ‘अधिक प्रभावी खरीद प्रक्रिया संबंधी निर्णय 2025 को ‘‘सुधार वर्ष’’ के रूप में मनाने की रक्षा मंत्रालय की पहल के अनुरूप है।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि खरीद प्रस्तावों को मंजूरी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डीएसी की हुई बैठक में दी गई। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय के मुताबिक डीएसी ने 54,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के आठ पूंजी अधिग्रहण प्रस्तावों को प्रारंभिक मंजूरी प्रदान की है। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय के मुताबिक भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के लिए एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (एईडब्लूएंडसी) एयरक्राफ्ट सिस्टम की खरीद पर डीएसी ने अपनी मुहर लगा दी है। उन्होंने कहा कि एईडब्लूएंडसी प्रणालियां वायुसेना की क्षमता में विस्तार करेंगी। यह युद्ध के सम्पूर्ण परिदृश्य को बदल सकती हैं तथा विभिन्न हथियार प्रणालियों की युद्ध क्षमता को तेजी से बढ़ा सकती हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा रक्षा मंत्रालय ने कहा कि डीएसी ने टी-90 युद्धक टैंकों को उन्नत करने के लिए 1,350 एचपी इंजन खरीदने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि इससे इन टैंक की युद्धक्षेत्र गतिशीलता बढ़ेगी, विशेष रूप से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में, क्योंकि इससे शक्ति-भार अनुपात में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा भारतीय सेना के लिए टी-90 टैंकों के लिए वर्तमान 1,000 एचपी इंजन को उन्नत करने के वास्ते 1,350 एचपी इंजन की खरीद हेतु प्रारंभिक मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि साथ ही डीएसी ने भारतीय नौसेना के लिए वरुणास्त्र टॉरपीडो की खरीद के एक अन्य प्रस्ताव पर भी अपनी मुहर लगा दी है। उन्होंने कहा कि वरुणास्त्र टॉरपीडो नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला द्वारा विकसित एक स्वदेशी जहाज से प्रक्षेपित पनडुब्बी रोधी टॉरपीडो है।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) ने भारतीय सेना के लिए 7,000 करोड़ रुपये की लागत से ‘एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम’ (एटीएजीएस) खरीदने के लिए एक बड़े सौदे को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि यह इस तरह की हॉवित्जर तोप के स्वदेशी निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि एटीएजीएस पहली स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित 155 मिमी तोप प्रणाली है तथा इसकी खरीद से भारतीय सेना की अभियानगत क्षमताओं में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि इस तोप प्रणाली में 52 कैलिबर लंबी बैरल होती है, जो 45 किलोमीटर तक की मारक क्षमता प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि बताया जा रहा है कि इस सौदे के तहत कुल 307 तोप और तोप ले जाने वाले 327 वाहन खरीदे जाएंगे।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि भारत की पश्चिमी (पाकिस्तान) और उत्तरी (चीन) सीमाओं पर तोप प्रणाली की तैनाती से सशस्त्र बलों को महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त मिलेगी, जिससे अभियानगत तैयारी और मारक क्षमता में वृद्धि सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि यह मंजूरी स्वदेशी रक्षा विनिर्माण और प्रौद्योगिकी प्रगति में भारत की बढ़ती ताकत को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल के प्रमाण एटीएजीएस को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय निजी उद्योग भागीदारों के बीच सहयोग के माध्यम से विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि बताया जा रहा है कि इसके 65 प्रतिशत से अधिक उपकरण घरेलू स्तर पर ही प्राप्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पुरानी हो चुकी 105 मिमी और 130 मिमी तोपों की जगह एटीएजीएस के आने से भारतीय सेना के तोपखाने के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण मदद मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि तोप प्रणाली के स्वदेशी उत्पादन से वैश्विक रक्षा निर्यात बाजार में भारत की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है, जिससे भविष्य में स्वदेशी रक्षा निर्यात का मार्ग प्रशस्त होगा।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि साथ ही रक्षा मंत्रालय ने भारत फोर्ज लिमिटेड और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के साथ उन्नत टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) और हाई मोबिलिटी गन टोइंग वाहनों की खरीद के लिए लगभग 6,900 करोड़ रुपये की लागत वाले अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि इन सौदों के साथ चालू वित्तवर्ष में अब तक पूंजीगत खरीद के लिए मंत्रालय द्वारा कुल 1.40 लाख करोड़ रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि 155 मिमी/52 कैलिबर एटीएजीएस, पुरानी और छोटी कैलिबर की तोपों की जगह लेगी और भारतीय सेना की तोपखाने की क्षमताओं को बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि इस तोप प्रणाली की खरीद तोपखाना रेजिमेंटों के आधुनिकीकरण में मील का पत्थर है। इससे परिचालन तत्परता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि अपनी असाधारण मारक क्षमता के लिए प्रसिद्ध एटीएजीएस, सटीक और लंबी दूरी के हमलों को सक्षम करके सेना की मारक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि जहां तक रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की बात है तो आप इन रक्षा उत्पादों पर नजर डालेंगे तो पाएंगे कि अधिकांश घरेलू उत्पादकों से ही खरीदे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरी तरह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने में अभी समय लगेगा इसलिए हमें बाहर से भी रक्षा उत्पाद खरीदने ही होंगे ताकि आधुनिकता के मामले में हम किसी से पीछे नहीं रहें। उन्होंने कहा कि आज के युद्धक्षेत्र में वही टिके रह सकते हैं, जो स्थिति के अनुसार बदल सकते हैं और खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस चीज पर ध्यान देना चाहिए कि जो रक्षा खरीद वह कर रही है उसे पूरा होने में ज्यादा समय नहीं लगे। उन्होंने कहा कि अभी दो तीन साल तक किसी खरीद को पूरा होने में लग जाते हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि जो रक्षा उत्पाद हम बना रहे हैं वह पूर्ण रूप से स्वदेशी हों। उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर बनाये जा रहे किसी उत्पाद में विदेशी मशीनों की आवश्यकता की वजह से उत्पादन में देरी होती है। उन्होंने कहा कि आप तेजस को ही देख लीजिये। सेना और वायुसेना को उसकी जरूरत है लेकिन अमेरिकी कंपनी जीई से इंजन नहीं आ पाने के चलते उनका उत्पादन लटका हुआ है। उन्होंने कहा कि खबर है कि दो इंजन आ रहे हैं और 12 इंजन अगले साल आयेंगे। उन्होंने कहा कि घरेलू रक्षा उत्पादों के निर्माण के समय हमें तेजस को एक उदाहरण के रूप में रखना चाहिए।
प्रश्न-2. रूस-यूक्रेन युद्ध में जमीनी हालात क्या हैं और संघर्षविराम के प्रयासों को कहां तक सफलता मिली है?
उत्तर- यूक्रेन पर रूस के तीन साल लंबे और लगातार आक्रमण में शांति हासिल करना एक मुश्किल काम रहा है। हालांकि 25 मार्च को व्हाइट हाउस ने घोषणा की कि रियाद में अमेरिकी, रूसी और यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडलों के बीच तीन दिनों की गहन समानांतर वार्ता के बाद दोनों पक्ष समुद्री युद्धविराम समझौते पर पहुँच गए हैं। उन्होंने कहा कि लोकप्रिय रूप से "ब्लैक सी डे" के रूप में प्रचारित यह समझौता ब्लैक सी में रूस या यूक्रेन द्वारा बल के उपयोग को प्रतिबंधित करने और वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ शत्रुता को समाप्त करने पर केंद्रित है।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच एक चीज और देखने को मिल रही है कि एक दूसरे पर जुबानी हमले भी किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे ही एक हमले में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि उनके रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन "जल्द ही मर जाएंगे" और इससे दोनों देशों के बीच युद्ध का अंत हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पेरिस में एक साक्षात्कार के दौरान ज़ेलेंस्की की टिप्पणी रूसी राष्ट्रपति के स्वास्थ्य के बारे में व्यापक अटकलों के बीच आई है। उन्होंने कहा कि ज़ेलेंस्की ने बुधवार को फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन के साथ अपनी बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि पुतिन जल्द ही मर जाएंगे, और यह एक तथ्य है, और यह युद्ध समाप्त हो जाएगा।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि जहां तक युद्धक्षेत्र की बात है तो वह वैसे ही चल रहा है जैसा पुतिन चलाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पुतिन आगे बढ़ते जा रहे हैं और जेलेंस्की एक देश से दूसरे देश जाकर मदद मांगते फिर रहे हैं लेकिन उन्हें अब तक कुछ ठोस हासिल नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि वह अपनी भूमि पुतिन के हाथों खोते जा रहे हैं और प्राकृतिक संसाधनों को डोनाल्ड ट्रंप के हाथों खो देंगे। उन्होंने कहा कि यूक्रेन पर हमले इस सप्ताह बढ़ते नजर आये। उन्होंने कहा कि आपातकालीन सेवाओं और यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया है कि रूसी सेना ने यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खार्किव पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया, जिसमें नौ लोग घायल हो गए और काफी नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय गवर्नर सेरही लिसाक ने बताया है कि रूसी ड्रोन हमले से केंद्रीय शहर द्निप्रो में भी आग लग गई। किसी के हताहत होने की तत्काल सूचना नहीं मिली। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के दक्षिणी बंदरगाह मायकोलाइव के मेयर ने कहा है कि रूसी ड्रोन के हमले के बाद बुधवार को शहर में आपातकालीन बिजली कटौती हुई। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी सेना ने कहा कि उसकी वायु रक्षा इकाइयों ने रूस द्वारा लॉन्च किए गए 117 ड्रोन में से 56 को मार गिराया। उन्होंने कहा कि इसके अलावा यूक्रेनी सेना ने रूस के इस आरोप को झूठा करार दिया है कि उसने रूस के कुर्स्क और ब्रायंस्क क्षेत्रों के साथ-साथ रूस के कब्जे वाले क्रीमिया में ऊर्जा सुविधाओं पर हमले किए हैं।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि जहां तक युद्धक्षेत्र की बात है तो आपातकालीन सेवाओं और यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया है कि रूसी सेना ने यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खार्किव पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया, जिसमें नौ लोग घायल हो गए और काफी नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय गवर्नर सेरही लिसाक ने बताया है कि रूसी ड्रोन हमले से केंद्रीय शहर द्निप्रो में भी आग लग गई। किसी के हताहत होने की तत्काल सूचना नहीं मिली। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के दक्षिणी बंदरगाह मायकोलाइव के मेयर ने कहा है कि रूसी ड्रोन के हमले के बाद बुधवार को शहर में आपातकालीन बिजली कटौती हुई। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी सेना ने कहा कि उसकी वायु रक्षा इकाइयों ने रूस द्वारा लॉन्च किए गए 117 ड्रोन में से 56 को मार गिराया। उन्होंने कहा कि इसके अलावा यूक्रेनी सेना ने रूस के इस आरोप को झूठा करार दिया है कि उसने रूस के कुर्स्क और ब्रायंस्क क्षेत्रों के साथ-साथ रूस के कब्जे वाले क्रीमिया में ऊर्जा सुविधाओं पर हमले किए हैं।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि इसके अलावा, यूक्रेन पर चर्चा करने के लिए यूरोपीय शिखर सम्मेलन से पहले पेरिस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन के साथ बोलते हुए, राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मॉस्को द्वारा काला सागर युद्धविराम के लिए अपनी शर्तें रखने के बाद वाशिंगटन के पास रूस को बिना शर्त युद्धविराम के लिए मजबूर करने की पर्याप्त शक्ति है। उन्होंने कहा कि वहीं क्रेमलिन ने कहा है कि मॉस्को अमेरिका के साथ अपने गहन संपर्क को जारी रखे हुए है और वाशिंगटन के साथ अब तक की बातचीत से प्रसन्न है। उन्होंने कहा कि क्रेमलिन के प्रवक्ता पेसकोव ने कहा है कि हम इस बात से संतुष्ट हैं कि हमारी बातचीत कितनी व्यावहारिक और रचनात्मक रूप से विकसित हो रही है और इसके कितने परिणाम मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका सुरक्षित नौवहन की अनुमति देने के लिए काला सागर में यूक्रेन के साथ अमेरिका की मध्यस्थता वाले युद्धविराम पर "सैद्धांतिक रूप से" सहमत होने के बाद रूस द्वारा की गई मांगों का मूल्यांकन करेगा। उन्होंने कहा कि रुबियो ने कहा है कि अमेरिकी अधिकारी "रूस की स्थिति को पूरी तरह से समझने के लिए काम करेंगे, या बदले में वे क्या मांग रहे हैं", और फिर निर्णय लेने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के समक्ष "इसे प्रस्तुत करेंगे"।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी एक साक्षात्कार में कहा है कि उन्हें लगता है कि रूस यूक्रेन के साथ अपने युद्ध को समाप्त करना चाहता है, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि मास्को "अपने कदम खींच सकता है"। उन्होंने कहा कि इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा है कि यूक्रेन में रूस के कब्जे वाला ज़ापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र युद्ध विराम के कुछ महीनों के भीतर फिर से चालू हो सकता है, लेकिन सभी छह रिएक्टरों को फिर से चालू करने में एक वर्ष से अधिक समय लगेगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन ने मास्को पर संयंत्र में सुरक्षा प्रबंधन करने में असमर्थ होने का आरोप लगाया है, क्योंकि उसने कहा था कि डीजल के भारी रिसाव की रिपोर्ट है। उन्होंने कहा कि वहीं रूस ने रिपोर्टों को "फर्जी" बताकर खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि जहां तक संघर्षविराम प्रस्ताव की बात है तो यह देखने को मिल रहा है कि अमेरिका अलग से रूस से बात कर रहा है और अलग से यूक्रेन से बात कर रहा है लेकिन मसले का समाधान तब तक नहीं निकलेगा जब तक रूस और यूक्रेन आमने सामने बैठकर बात नहीं करेंगे।
प्रश्न-3. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के श्रीलंका दौरे के क्या मायने हैं?
उत्तर- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पांच अप्रैल को श्रीलंका की यात्रा पर आएंगे। राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के श्रीलंका दौरे की संसद में घोषणा करते हुए कहा है कि मोदी 2024 में राष्ट्रपति दिसानायके की दिल्ली यात्रा के दौरान हुए समझौतों को अंतिम रूप देने के लिए कोलंबो आएंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने संसद को यह भी बताया है कि पूर्वी बंदरगाह जिले त्रिंकोमाली में सामपुर विद्युत संयंत्र का निर्माण कार्य मोदी की यात्रा के समय ही शुरू होगा। उन्होंने कहा कि श्रीलंका और भारत ने त्रिंकोमाली में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए पिछले महीने एक समझौता पर हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का श्रीलंका दौरा काफी मायने रखता है क्योंकि वहां चीन अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है लेकिन श्रीलंका की जनता जानती है कि हालिया आर्थिक और राजनीतिक उथल पुथल के बीच भारत ही सच्चे मित्र की तरह निस्वार्थ भाव से श्रीलंका के साथ खड़ा हुआ था।
प्रश्न-4. चीनी सेना ने नॉन-कॉम्बेट मामलों में डीपसीक एआई का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। भारतीय सेना एआई या आधुनिक तकनीक का कैसे और कितना उपयोग कर रही है?
उत्तर- चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने गैर-लड़ाकू कार्यों के लिए विशेष रूप से सैन्य अस्पतालों में चीनी AI उपकरण 'डीपसीक' का उपयोग करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि AI उपचार योजनाएँ विकसित करने में डॉक्टरों की सहायता करता है और इसका उपयोग अन्य नागरिक क्षेत्रों में भी किया जाता है।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक डीपसीक के ओपन-सोर्स लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) PLA अस्पतालों, पीपुल्स आर्म्ड पुलिस (PAP) और राष्ट्रीय रक्षा जुटाव इकाइयों में उपयोग में लिये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस महीने की शुरुआत में PLA सेंट्रल थिएटर कमांड के जनरल अस्पताल ने डीपसीक के R1-70B LLM की "एम्बेडेड तैनाती" के बारे में बताया था। उन्होंने कहा कि साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल ने कहा कि AI डॉक्टरों की सहायता के लिए उपचार योजना सुझाव प्रदान करता है। इसने इस बात पर भी जोर दिया कि रोगी का डेटा सुरक्षित रहता है, सभी जानकारी स्थानीय सर्वर पर संग्रहित और संसाधित होती है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा बीजिंग में PLA जनरल अस्पताल सहित अन्य PLA अस्पतालों जिन्हें "301 अस्पताल" के रूप में जाना जाता है, ने भी डीपसीक को तैनात किया है। उन्होंने कहा कि यह अस्पताल वरिष्ठ चीनी अधिकारियों और सैन्य अधिकारियों का इलाज करता है और संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा को संभालता है।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि पीएलए ने पहले कहा था कि एआई को सैन्य अभियानों में मानवीय निर्णय लेने में सहायता करनी चाहिए, लेकिन उसकी जगह नहीं लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनवरी में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी डेली ने लिखा था, "जैसे-जैसे एआई विकसित होता है, इसे मानवीय निर्णय द्वारा निर्देशित एक उपकरण बने रहना चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि जवाबदेही, रचनात्मकता और रणनीतिक अनुकूलनशीलता सैन्य निर्णय लेने में सबसे आगे रहे।" उन्होंने कहा कि लेख में आगे कहा गया था कि एआई को मानव निर्णय-निर्माताओं के साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि कमांड प्रभावशीलता को अनुकूलित किया जा सके और मानव एजेंसी को बदलने के बजाय उसे बढ़ाया जा सके।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि डीपसीक के नवीनतम एआई मॉडल ने चैटजीपीटी जैसे स्थापित मॉडल की तुलना में अपनी कम कम्प्यूटेशनल आवश्यकताओं के चलते ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि इस ऐप ने हाल ही में ऐप्पल के ऐप स्टोर पर शीर्ष रैंक वाले मुफ़्त ऐप के रूप में चैटजीपीटी को पीछे छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि उम्मीद जताई जा रही है कि इन एआई मॉडल का उपयोग भविष्य में चीनी सेना द्वारा युद्ध के मैदान की खुफिया जानकारी, निगरानी और निर्णय लेने में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सैन्य अस्पतालों से परे चीन स्वास्थ्य सेवा, विनिर्माण और शहरी विकास में एआई के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है। कुछ सरकारी एजेंसियों ने भी भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों में डीपसीक मॉडल को अपनाया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के तहत काम करने वाली पीएपी की इकाइयों ने दैनिक शारीरिक प्रशिक्षण और मनोवैज्ञानिक परामर्श के लिए एआई का उपयोग करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि हैनान के अर्धसैनिक बल के राजनीतिक कार्य विभाग ने बताया है कि सैनिकों ने चिंता को प्रबंधित करने और व्यायाम योजनाएँ बनाने के लिए डीपसीक का इस्तेमाल किया।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि पीएलए ने पहले भी सैन्य निर्णय लेने में एआई के इस्तेमाल का समर्थन किया है। उन्होंने कह कि पीएलए अपने संचालन में एआई सहित उच्च-स्तरीय तकनीक को एकीकृत करने के लिए काम कर रहा है। इसमें ड्रोन रणनीति, पायलट प्रशिक्षण और युद्ध के मैदान में निर्णय लेने में सहायता में सुधार करना शामिल है। उन्होंने कहा कि पिछले महीने एक रिपोर्ट में चीनी सरकारी अखबार गुआंगमिंग डेली ने कहा था कि डीपसीक "सैन्य बुद्धिमत्ता प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जो सैन्य बुद्धिमत्ता के विकास में एक नया अध्याय शुरू कर रहा है।" उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में कहा गया है कि डीपसीक वास्तविक समय में बड़ी मात्रा में युद्ध के मैदान के डेटा को संसाधित कर सकता है, जिससे स्थितिजन्य जागरूकता में सुधार होता है। उन्होंने कहा कि वैसे चीन के रुख को देखते हुए कहा जा सकता है कि वह भले नॉन-काम्बेट मामलों में एआई के उपयोग की बात कर रहा है लेकिन ऐसा हो नहीं सकता कि वह कॉम्बेट मामलों में एआई का उपयोग नहीं करे। उन्होंने कहा कि साइबर वार में तो चीन एआई का उपयोग कर ही रहा है।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि जहां तक भारतीय सेना की ओर से एआई और अन्य आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल की बात है तो यह काम हम आज से नहीं बल्कि हाल के कुछ वर्षों से लगातार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चाहे किसी भी स्तर पर दिये जा रहे प्रशिक्षण की बात हो, निगरानी की बात हो, ड्रोन तकनीक की बात हो, रोबोट की बात हो आपको हर जगह एआई का उपयोग नजर आयेगा। उन्होंने कहा कि इसके अलावा भारतीय वायुसेना ने तो बाकायदा एआई से संबंधित एक सेंटर भी बना रखा है। उन्होंने कहा कि वैसे यह सही है कि हम चीनी सेना के जितना एआई का उपयोग नहीं कर रहे हैं लेकिन हमारे वैज्ञानिक और रिसर्चर लगातार इस काम में लगे हुए हैं कि कैसे सेना को आधुनिक तकनीकों से लैस किया जाये। उन्होंने कहा कि लेकिन एक चीज और है कि एआई जो भी काम करता है वह उसे मिल रहे या दिये गये डेटा के आधार पर करता है लेकिन युद्ध क्षेत्र में स्थितियां कभी भी बदल सकती हैं या आपने जो रणनीति बनाई हो उससे अलग स्थिति दुश्मन पैदा कर सकता है, ऐसे में एआई मदद नहीं कर पायेगा क्योंकि वह हर स्थिति के लिए तैयार नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि एआई मददगार है लेकिन मानव बल की जगह कभी नहीं ले सकता।