By अभिनय आकाश | Jul 29, 2023
वैसे तो इस्लाम के सभी अनुयायी खुद को मुसलमान कहते हैं। लेकिन इस्लामी कानून यानी फिकह और इतिहास की अपनी-अपनी समझ के अनुसार मुसलमान कई पंथों में बंटा है। मुसलमान 3 अभिजात में से एक अहमदिया मुसलमानों के साथ पाकिस्तान में टकराव की घटना लगातार आती रही है जिनमें उनकी मौत भी होती रही। वहीं भारत में भी अहमदिया खबरों में बने रहते हैं। दरअसल, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने अहमदिया मुस्लिम समुदाय के खिलाफ उत्पीड़न के एक मामले में हस्तक्षेप किया है जिसमें आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड ने एक प्रस्ताव पारित कर समुदाय को काफिर और गैर मुस्लिम बताया था। अल्पसंख्य मामलों की मंत्री स्मृति ईरानी ने आंध्र प्रदेश के वक्फ बोर्ड के उस प्रस्ताव पर ये बयान दिया है, जिसमें अहमदिया को काफिर और गैर मुस्लिम बताया गया है। मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा ए हिंद ने भी वक्फ बोर्ड के इस प्रस्ताव समर्थन किया है। आपको बताते हैं कि अहमदियों की पूरी कहानी क्या है, जिनके मुस्लिम होने पर सवाल उठते हैं। इन्हें हज तक की इजाजत नहीं और पाकिस्तान में इनके इबादतगाहों को भी लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
अहमदिया को लेकर जमीयत का फतवा
आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड ने एक प्रस्ताव पारित कर समुदाय को काफिर और गैर मुस्लिम बताया था। 2012 में आंध्र प्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड ने एक प्रस्ताव पारित कर पूरे अहमदिया समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया। हालाँकि, इस प्रस्ताव को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने निलंबित कर दिया था। अदालत के आदेश के बावजूद वक्फ बोर्ड ने चालू वर्ष के फरवरी में एक और उद्घोषणा जारी की, जिसमें जमीयत उलेमा द्वारा जारी फतवे के आधार पर अहमदिया समुदाय को "काफिर" घोषित किया गया। अहमदिया मुस्लिम समुदाय के एक प्रतिनिधित्व के जवाब में, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने वक्फ बोर्ड के कार्यों पर कड़ी चिंता व्यक्त की, इसे विशेष रूप से अहमदिया समुदाय को लक्षित करने वाला "घृणा अभियान" करार दिया।
अल्पसंख्यक मंत्रालय ने जताई चिंता
इस कदम पर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने कड़ी चिंता व्यक्त की है और इसकी निंदा की है। आंध्र प्रदेश सरकार को कड़े शब्दों में लिखे एक पत्र में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने वक्फ बोर्ड के प्रस्ताव को एक नफरत अभियान बताया, जिसका पूरे देश में असर हो सकता है। पत्र में कहा गया कि बड़े पैमाने पर अहमदिया समुदाय के खिलाफ घृणा अभियान है और वक्फ बोर्ड के पास अहमदिया सहित किसी भी समुदाय की धार्मिक पहचान निर्धारित करने का अधिकार नहीं है।
भारत से निकलकर दुनियाभर में फैले अहमदिया
2011 की जनगणना में अहमदिया समुदाय को मुसलमानों के एक वर्ग के तौर पर स्वीकार किया गया है। पाकिस्तान में इनकी आबादी 40 लाख बताई जाती है, जो पाकिस्तान की कुल आबादी का 2.2 फीसदी है। कभी पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के रबवाह शहर अहमदिया समुदाय का वैश्विक मुख्यालय हुआ करता था, लेकिन फिलहाल यह इंग्लैंड से ऑपरेट किया जाता है। भारत और पाकिस्तान के अलावा जर्मनी, तंजानिया, केन्या जैसे कई देशों में भी बड़ी संख्या में अहमदी समुदाय के लोग रहते हैं। नाइजीरिया में 25 लाख और इंडोनेशिया में 4 लाख अहमदिया समुदाय के लोग रहते हैं। दुनिया भर में अहमदिया कम्युनिटी की 16 हजार मस्जिदें, 600 स्कूल और 30 अस्पताल हैं।
पाकिस्तान और अहमदिया
सबसे पहले आपको धर्म के आधार पर बने पाकिस्तान के धार्मिक पृष्ठभूमि से अवगत कराते हैं। पाकिस्तान में 95 से 98 प्रतिशत इस्लाम को मानने वाले लोग हैं। यहां के मुसलमान 3 अभिजात में विभाजित हैं जिनमें सुन्नी, शिया और अहमदिया शामिल हैं। आम सुन्नी मुसलमानों का मत हैं कि इस्लाम के अंतर्गत 'अहमदिया' वो भटके हुए लोग हैं जिनका इस्लाम से कोई लेना देना नहीं है और ये अपनी हरकतों से लगातार इस्लाम का नाम खराब कर रहे हैं।
पाकिस्तान में तोड़ी जा रही हैं अहमदिया की मस्जिदें
भारत में जहां मोदी सरकार अहमदिया मुस्लिमों का खुले तौर पर समर्थन कर रही है। वहीं पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में मुस्लिम कट्टरपंथी हिंसा पर उतारू हैं। अहमदिया मुसलमानों की मस्जिदों की मीनारों को जबरदस्ती तोड़ा जा रहा है और अहमदिया मुसलमानों को भी सताया जा रहा है। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार अहमदी समुदाय के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। डॉन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अहमदियों को ईदुल अजहा पर कुर्बानी देने से रोकने के लिए पिछले महीने एक अभियान के बाद, समुदाय के खिलाफ शुरू किए गए नवीनतम अभियान में उनके इबादत स्थलों की मीनारों को ध्वस्त करना किया जा रहा है। इस अभियान का नेतृत्व तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान को धो डाला
मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने पाकिस्तान में अहमदियों के साथ हो रहे व्यवहार पर चिंता व्यक्त की है और सरकार से अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के आरोपों पर जवाब देने को कहा है। ओएचसीएचआर ने अपने पत्र में कहा कि हम आपकी सरकार का ध्यान उस जानकारी की ओर दिलाना चाहते हैं जो हमें बढ़ते भेदभाव और पाकिस्तान में अहमदी धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत भरे भाषण और हिंसा भड़काने की बढ़ती घटनाओं के बारे में मिली है, जिसमें उनके इबादत स्थलों पर हमले और डराने-धमकाने के अन्य कृत्य शामिल हैं।