By अनन्या मिश्रा | Mar 31, 2025
पंजाब की बेटी और यूपी की बहु कही जाने वाली शीला दीक्षित का 31 मार्च को जन्म हुआ था। शीला दीक्षित तीन बार दिल्ली की सत्ता संभाल चुकी थीं। वह कांग्रेस की दिग्गज नेताओं में शामिल थीं। शीला दीक्षित का राजनीतिक सफर जितना ज्यादा शानदार रहा, उतनी ही उनकी निजी जिंदगी भी रोचक थी। शीला दीक्षित ने अपने ससुर से राजनीति के दांव-पेंच सीखे थे। कई राजनीतित उपलब्धियों को अपने नाम करने वाली शीला दीक्षित कांग्रेस नेताओं की टीम का एक बड़ा नाम बन गईं। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर शीला दीक्षित के जीवन से जुड़े कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और शिक्षा
पंजाब के कपूरथला में 31 मार्च 1938 को शीला दीक्षित का जन्म हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई दिल्ली से पूरी की। उन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा कॉन्वेंट आफ जीसस एंड मैरी स्कूल से पूरी की थी। फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस कॉलेज से कला में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की और फिर बाद में पीएचडी किया।
प्रेम विवाह
पूर्व राज्यपाल व केंद्रीय मंत्री रहे उमा शंकर दीक्षित के बेटे विनोद दीक्षित से शीला दीक्षित का प्रेम विवाह किया था। दरअसल, शीला और विनोद एक ही क्लास में पढ़ते थे। इस दौरान दोनों को प्यार हो गया था। लेकिन अंतरजातीय विवाह की अड़चन की वजह से ठंडी पड़ गई। कॉलेज के बाद विनोद प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास की और शीला एक स्कूल में पढ़ाने लगी। इसी बीच विनोद ने अपने पिता से शीला को मिलवाया। उमाशंकर दीक्षित को शीला बहुत पसंद आईं। विनोद और शीला ने दो साल इंतजार किया और फिर परिवार की रजामंदी से शादी की।
राजनीतिक सफर
शादी के बाद शीला दीक्षित ने अपने ससुर के लिए काम करना शुरूकर दिया था। उस दौरान उमाशंकर दीक्षित इंदिरा गांधी की सरकार में मंत्री बने और शीला अपने ससुर की कानूनी सहायता किया करती थीं। जब इंदिरा गांधी को शीला दीक्षित के बारे में पता चला तो उन्होंने संयुक्त राष्ट्र कमिशन के दल के सदस्य के तौर पर शीला को नामित किया। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं का प्रतिनिधित्व करना था। यही से शीला दीक्षित के राजनीतिक सफर की शुरूआत हुई थी। साल 1970 में शीला दीक्षित युवा महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनीं। फिर साल 1984 से 1989 वह कन्नौज सीट से लोकसभा सदस्य बनीं।
उपलब्धियां
शीला दीक्षित ने केंद्रीय मंत्री के पद पर भी काम किया। उन्होंने दो पीएमओ में राज्यमंत्री संसदीय कार्य मंत्रालय का कार्यभार संभाला। वहीं साल 1990 में शीला दीक्षित ने महिलाओं के खिलाफ अत्याचार को लेकर आंदोलन किया। फिर साल 1998 में वह पहली बार दिल्ली की सीएम बनीं और लगातार 3 बार वह इस पद पर बनी रहीं। वहीं साल 2014 में शीला दीक्षित को केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया। लेकिन कुछ महीनों बाद उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया।
मृत्यु
वहीं हृदय संबंधी रोगों के चलते 20 जुलाई 2019 को 81 साल की उम्र में शीला दीक्षित का निधन हो गया था।