By अभिनय आकाश | May 20, 2024
भले ही दुनिया ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी की आकस्मिक मृत्यु के शोक में शामिल हो रही है, लेकिन सबसे प्रासंगिक सवाल यह नहीं है कि अगला राष्ट्रपति कौन होगा, बल्कि अगला अयातुल्ला या ईरान का सर्वोच्च नेता कौन होगा। पूर्व में देश की न्यायपालिका का नेतृत्व कर चुके कट्टरपंथी रईसी को खामेनेई के शिष्य के रूप में देखा जाता था और कुछ विश्लेषकों का कहना था कि खामेनेई के निधन या इस्तीफे के बाद वह 85 वर्षीय नेता की जगह ले सकते थे।
रायसी की मृत्यु के बाद बढ़ेगी सत्ता की लड़ाई
ईरान के उत्तर-पश्चिम स्थित पहाड़ी क्षेत्र में खराब मौसम की वजह से हुए हेलीकॉप्टर हादसे में राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी, विदेश मंत्री और अन्य लोग दुर्घटनास्थल पर मृत पाए गए। देश की सरकारी मीडिया ने यह जानकारी दी। ईसी हादसे के समय ईरान के पूर्वी अजरबैजान प्रांत में यात्रा कर रहे थे। उसने बताया कि इस हादसे में रईसी के साथ जिन लोगों के शव मिले हैं, उनमें ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीराब्दुल्लाहियन (60) भी शामिल हैं। ईरान के संविधान में पहले से ही यह प्रावधान है कि यदि पदधारी की मृत्यु हो जाती है तो देश का अंतरिम राष्ट्रपति कौन बनेगा। पहला उपराष्ट्रपति स्वचालित रूप से अस्थायी नेतृत्व ग्रहण करता है और न्यायपालिका प्रमुख और संसद अध्यक्ष के साथ मिलकर 50 दिनों के भीतर एक नया राष्ट्रपति चुनाव कराता है। प्रथम उपराष्ट्रपति का पद संभालने वाले मोहम्मद मोखबर फिलहाल देश के अस्थायी राष्ट्रपति होंगे।
कौन है नए राष्ट्रपति मोखबर
मोहम्मद मोखबर ने सरकार में प्रमुख पदों पर कार्य किया है। उन्होंने खास तौर पर ‘बोनयाद’ या धर्मार्थ संगठनों में बड़ी भूमिका निभाई है। ईरान की 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद जब्त की गई संपत्ति से इन संगठनों को बढ़ावा मिला। इनमें वे संपत्तियां भी थीं जो पहले ईरान के शाह या उनकी सरकार से जुड़ी थीं। मोखबर ने दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रुहोल्ला खुमैनी से संबधित एक धर्मार्थ फाउंडेशन का जिम्मा संभाला। इस संगठन को ‘इमाम खुमैनी के आदेश की तामील’ (ईआईकेओ) के रूप में जाना जाता है।
सबसे बड़ा सवाल
बेशक सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगला सर्वोच्च नेता कौन होगा क्योंकि अयातुल्ला अली खामेनेई पहले से ही 85 साल के हैं और उन्होंने 30 साल तक देश का नेतृत्व किया है। पहले माना जा रहा था कि राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी उनके उत्तराधिकारी बनने की कतार में हैं लेकिन उनकी आकस्मिक मृत्यु ने गणित में भी अचानक बदलाव ला दिया है। परिणाम केवल ईरान के घरेलू मामलों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि विशेष रूप से ऐसे अस्थिर समय में इसकी सीमाओं से परे ईरान के कद पर भी असर पड़ने की संभावना है। हालाँकि, रायसी के चले जाने से खामेनेई के बेटे मोजतबा के लिए संभावनाएँ वास्तव में बहुत बढ़ गई हैं, जिन्हें पहले से ही कुछ हलकों में शीर्ष दावेदारों में से एक माना जाता था। 8 सितंबर, 1969 को मशहद में जन्मे मोजतबा खामेनेई ईरानी राजनीति में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं और अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे सबसे बड़े बेटे हैं। मोजतबा का पालन-पोषण और करियर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और ईरान के लिपिक प्रतिष्ठान से निकटता से जुड़ा हुआ है। वह कम उम्र में आईआरजीसी में शामिल हो गए और 1980 के दशक के दौरान ईरान-इराक युद्ध में भाग लिया। युद्ध के बाद, उन्होंने प्रमुख रूढ़िवादी मौलवियों के मार्गदर्शन में शिया छात्रवृत्ति के एक प्रमुख केंद्र क़ोम में धार्मिक अध्ययन किया।
हेलिकॉप्टर क्रैश के पीछे मोजताबा खामनेई?
हेलिकॉप्टर क्रैश में इब्राहिम रईसी समेत 9 लोगों की मौत हो गई, उसके पीछे अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजताबा खामेनेई का हाथ बताया जा रहा है। कई ईरानी एक्टिविस्ट ने ये सवाल उठाया है। ईरानी पत्रकार मसीह अलीनेजाद ने सोशल मीडिया एप एक्स पर लिखा कि कई कंस्पिरेसी थ्योरीज में से एक ये भी है कि इस दुर्घटना में खामेनेई के बेटे का हाथ हो सकता है, ताकि वो अपने पिता की जगह लेने का रास्ता आसान कर सके।